नई दिल्ली | 14 अगस्त 2026
भारत की संसद ने ऐसा कानून पारित किया है, जिसका उद्देश्य राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों और खनिज वाली जमीनों पर नए टैक्स, सेस या अन्य शुल्क लगाने की शक्ति को सीमित करना है। नए प्रावधानों के तहत ऐसे शुल्क केंद्र सरकार द्वारा तय शर्तों के अनुरूप ही लगाए जा सकेंगे।
क्या बदलेगा?
नए कानून से खनन क्षेत्र में अलग-अलग राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले संभावित नए शुल्कों को लेकर कंपनियों और निवेशकों के लिए अधिक एकरूपता आने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य खनन गतिविधियों की लागत और नियामकीय व्यवस्था को अधिक अनुमानित बनाना है।
क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिज औद्योगिक उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण हैं। कर व्यवस्था में अधिक स्पष्टता से खनन कंपनियों की लागत योजना और निवेश संबंधी निर्णयों पर असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष:
यह बदलाव केंद्र और राज्यों के बीच खनिज राजस्व एवं कराधान के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण नीतिगत प्रभाव डाल सकता है।
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